पिछले एक महीने में Waaree Energies Ltd के शेयर में लगभग 11 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है, जिससे निवेशकों का ध्यान एक बार फिर इस रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी की ओर गया है। शुक्रवार को शेयर 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹2,894.65 पर बंद हुआ और मौजूदा स्तर पर बाजार में यह चर्चा तेज है कि क्या यह शेयर ₹3,400 तक की नई ऊंचाई छू सकता है या फिर इसमें बड़ी गिरावट आ सकती है। कंपनी के दिसंबर तिमाही के नतीजों ने इस तेजी को मजबूत आधार दिया है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा साल-दर-साल आधार पर 118.35 प्रतिशत बढ़कर ₹1,106.79 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹506.88 करोड़ था। राजस्व भी 118.81 प्रतिशत उछलकर ₹7,565.05 करोड़ पर पहुंच गया, जो एक साल पहले ₹3,457.29 करोड़ था। इतने दमदार नतीजों ने यह संकेत दिया है कि कंपनी की ग्रोथ केवल कहानी नहीं, बल्कि आंकड़ों में भी दिखाई दे रही है।

दमदार नतीजे और बिजनेस विस्तार की रणनीति
कंपनी की ग्रोथ का बड़ा कारण सोलर और एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग है। कंपनी ने हाल ही में लिथियम-आयन एडवांस्ड केमिस्ट्री स्टोरेज सेल और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 3.5 GWh से बढ़ाकर 20 GWh करने की मंजूरी दी है। इस विस्तार के लिए लगभग ₹8,000 करोड़ का अतिरिक्त पूंजीगत व्यय उसकी सहायक कंपनी Waaree Energy Storage Solutions Pvt Ltd में किया जाएगा। कंपनी आंध्र प्रदेश सरकार सहित अन्य राज्यों के साथ ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने पर चर्चा कर रही है। यह कदम साफ संकेत देता है कि कंपनी केवल मौजूदा मांग पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी क्षमता बढ़ा रही है।
इसके अलावा कंपनी के सीईओ Amit Paithankar पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अमेरिकी बाजार कंपनी की रणनीति का अहम हिस्सा है और कुल ऑर्डर बुक का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका से आता है। अमेरिका में एआई डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बढ़ती मांग सोलर पावर के लिए मजबूत अवसर पैदा कर रही है। पारंपरिक बिजली परियोजनाओं में जहां पांच से छह साल लग जाते हैं, वहीं सोलर ऊर्जा कम लागत और तेजी से स्थापित की जा सकती है, जिससे कंपनी को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल रही है।
टेक्निकल चार्ट क्या दे रहे हैं संकेत?
फंडामेंटल मजबूत होने के बावजूद टेक्निकल विश्लेषकों की राय थोड़ी बंटी हुई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ₹2,970 से ₹3,000 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस जोन बन गया है और यहां से शेयर को बिकवाली का सामना करना पड़ सकता है। ₹2,850 के आसपास तत्काल सपोर्ट दिखाई दे रहा है और यदि यह स्तर टूटता है तो कीमत ₹2,700 या उससे नीचे तक फिसल सकती है। वहीं दूसरी ओर कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ₹3,215 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट मिलने पर शेयर में तेज रफ्तार आ सकती है और यह ₹3,400 तक पहुंच सकता है। शॉर्ट टर्म में ₹2,800 से ₹3,400 का दायरा संभावित ट्रेडिंग रेंज माना जा रहा है।
मध्यम अवधि के निवेशकों के लिए ‘बाय ऑन डिप्स’ और ‘सेल ऑन रैलिज’ की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। कुल मिलाकर कंपनी के नतीजे और विस्तार योजनाएं मजबूत तस्वीर पेश कर रही हैं, लेकिन मौजूदा स्तर पर टेक्निकल बाधाएं भी मौजूद हैं। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय स्पष्ट ब्रेकआउट या मजबूत सपोर्ट पर ही फैसला लेना समझदारी हो सकती है।
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