ट्रंप प्रशासन का बड़ा वार: भारतीय सोलर इम्पोर्ट पर 126% टैक्स, Waaree Energies Limited समेत सोलर शेयरों में मचा हड़कंप!

अमेरिका में एक बार फिर सोलर सेक्टर को लेकर बड़ा झटका सामने आया है, जब Donald Trump के प्रशासन ने भारत से होने वाले सोलर इम्पोर्ट पर 126 प्रतिशत की प्रारंभिक ड्यूटी लगाने का फैसला किया। इस फैसले के बाद भारतीय सोलर कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली और निवेशकों में घबराहट फैल गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, US Commerce Department ने यह दर विदेशी सब्सिडी के आधार पर तय की है, जिनके जरिए कथित तौर पर भारतीय निर्यातक अमेरिकी कंपनियों को कीमतों में मात दे रहे थे।

Trump 126 percent tax on Indian solar imports

बुधवार, 25 फरवरी को बाजार खुलते ही Waaree Energies Limited और Premier Energies Limited समेत कई सोलर कंपनियों के शेयरों में 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। Waaree Energies का शेयर सुबह के सत्र में गिरकर 2,721 रुपये तक पहुंच गया, जबकि Premier Energies के शेयर में लोअर सर्किट लग गया और ट्रेडिंग कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी। इसके अलावा Vikram Solar Limited के शेयर भी लगभग 5.72 प्रतिशत टूट गए, जिससे यह साफ हो गया कि पूरा सोलर सेक्टर इस फैसले से प्रभावित है।

126% ड्यूटी क्यों लगाई गई और क्या है पृष्ठभूमि

अमेरिका ने केवल भारत ही नहीं बल्कि इंडोनेशिया और लाओस से होने वाले सोलर इम्पोर्ट पर भी भारी ड्यूटी लगाई है। इंडोनेशिया पर 86 से 143 प्रतिशत और लाओस पर 81 प्रतिशत तक की दर तय की गई है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग का कहना है कि इन देशों की सरकारों द्वारा दी गई सब्सिडी से वहां के निर्यातकों को अनुचित लाभ मिला और अमेरिकी घरेलू उत्पादकों को नुकसान हुआ।

यह नई ड्यूटी पहले लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ से अलग है। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद ट्रंप ने 10 प्रतिशत का सार्वभौमिक टैरिफ घोषित किया था, जिसे सप्ताहांत में बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया। 10 प्रतिशत टैरिफ स्थानीय समयानुसार बीती रात से लागू भी हो चुका है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत से अमेरिका को होने वाला सोलर इम्पोर्ट 792.6 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो 2022 के मुकाबले नौ गुना से अधिक है। यही तेज वृद्धि अब भारतीय कंपनियों के लिए चुनौती बन गई है। सिटी के विश्लेषक विक्रम बागरी का मानना है कि इतनी ऊंची ड्यूटी के बाद अमेरिकी बाजार भारतीय सोलर पैनल निर्माताओं के लिए लगभग बंद जैसा हो सकता है।

आगे क्या होगा? कंपनियों की रणनीति और निवेशकों की नजर

Waaree Energies का अमेरिका में मजबूत नेटवर्क है और कंपनी ने दिसंबर तिमाही की कमाई कॉल में अमेरिका को प्रमुख बाजार बताया था। कंपनी ने हाल ही में Meyer Burger का अधिग्रहण भी किया है और ऑर्गेनिक तथा इनऑर्गेनिक दोनों तरह की ग्रोथ पर काम कर रही है। तीसरी तिमाही के अंत तक कंपनी के पास 60,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक था और FY26 के लिए 5,500 से 6,000 करोड़ रुपये के EBITDA लक्ष्य को पार करने का भरोसा भी जताया गया था। कंपनी की दिसंबर तिमाही की आय में 32.6 प्रतिशत योगदान विदेशी बाजारों से आया था, जिससे अमेरिकी फैसले का असर साफ दिखाई देता है।

Premier Energies की अमेरिकी हिस्सेदारी सीमित है, जबकि Vikram Solar की करीब 20 प्रतिशत ऑर्डर बुक एक्सपोर्ट से जुड़ी है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल अप्रैल में जब अमेरिका ने चार दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई थी और भारत को बाहर रखा था, तब Waaree और Premier के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई थी।

अब निवेशकों के सामने बड़ा सवाल यह है कि क्या भारतीय कंपनियां अपने निर्यात बाजारों को विविध बनाएंगी या अमेरिका में स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाकर इस ड्यूटी के असर को कम करेंगी। फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन लंबी अवधि में यह फैसला भारतीय सोलर उद्योग को आत्मनिर्भरता और नए बाजारों की तलाश की दिशा में और तेज कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

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