मध्य-पूर्व में उठी तनाव की आंधी ने इस बार भारतीय शेयर बाजार को भी अपनी चपेट में ले लिया। सोमवार, 2 मार्च 2026 को जब बाजार खुला, तो रिन्युएबल एनर्जी सेक्टर के दिग्गज शेयर Waaree Energies, Adani Green Energy, NTPC Green Energy और Suzlon Energy – लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। निवेशकों के करोड़ों रुपये इस एक दिन में स्वाहा हो गए। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि ये सब हुआ क्यों।

ईरान-इज़राइल संकट: जो चिंगारी बनी बाजार के लिए तूफान
शनिवार की सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई तेहरान में मारे गए। ईरानी राज्य मीडिया ने रविवार को इस बात की पुष्टि की। इस घटना के बाद ईरान ने पलटवार करते हुए इज़राइल और अरब देशों पर मिसाइल दागना शुरू कर दिया। जब भी मध्य-पूर्व में इस तरह का भू-राजनीतिक संकट उठता है, तो वैश्विक बाजारों में हलचल मचना तय होती है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, डॉलर की मजबूती और निवेशकों में घबराहट. ये सब मिलकर शेयर बाजार को दबाव में ला देते हैं। यही हुआ 2 मार्च को भारतीय बाजार के साथ।
Waaree Energies और Adani Green: सोलर सेक्टर को लगा बड़ा झटका
Waaree Energies, जो भारत की सबसे बड़ी सोलर मॉड्यूल निर्माता कंपनियों में से एक है, के शेयर 2 मार्च को NSE पर सुबह 11:43 बजे 2.9% की गिरावट के साथ ₹2,630.60 प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे थे। कंपनी का बाजार पूंजीकरण उस वक्त ₹75,666.82 करोड़ रहा। यह देखना दिलचस्प है कि यही शेयर 12 सितंबर 2024 को ₹3,865 के 52-हफ्ते के उच्च स्तर पर था, जबकि 7 अप्रैल 2025 को यह ₹1,863 के निचले स्तर तक भी गिरा था। यानी शेयर में उतार-चढ़ाव का लंबा सफर रहा है।
दूसरी ओर, Adani Green Energy की बात करें तो इसकी सहायक कंपनी Adani Green Energy Twenty Five C Ltd ने 28 फरवरी को गुजरात के खावड़ा में 185 MW के विंड पावर प्रोजेक्ट को चालू किया था। इस उपलब्धि के बाद कंपनी की कुल परिचालन क्षमता बढ़कर 17,472.2 MW हो गई थी। लेकिन इस सकारात्मक खबर के बावजूद, वैश्विक अनिश्चितता के चलते Adani Green के शेयर भी दबाव में आ गए।
NTPC Green Energy और Suzlon: हरित ऊर्जा का हरा रंग हुआ फीका
NTPC Green Energy के शेयर भी इस गिरावट से नहीं बच सके और NSE पर ₹88.15 पर 2.21% नीचे कारोबार कर रहे थे। बता दें कि 25 फरवरी को ही कंपनी ने NTPC Renewable Energy के जरिए गुजरात में Dayapar Wind Energy Project Phase-II के तहत 200 MW में से 50 MW की पहली क्षमता चालू की थी। इसके बाद NTPC Green Energy Group की कुल स्थापित क्षमता 9,201.08 MW हो गई थी। Suzlon Energy की स्थिति सबसे चिंताजनक रही. इसका शेयर 4.43% टूटकर ₹40.78 पर आ गया और इंट्राडे में यह 8.29% की बड़ी गिरावट के साथ ₹39.13 तक चला गया, जो इसका 52-हफ्ते का निम्नतम स्तर था। हालांकि, कंपनी ने हाल ही में अपने व्यापार को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
Suzlon ने एक Group Executive Council (GEC) का गठन किया, JP ChalasanI को GEC में शामिल किया और एक नए Group CEO की नियुक्ति की ताकि कंपनी को एक साधारण विंड एनर्जी कंपनी से एक पूर्ण-स्तरीय रिन्युएबल एनर्जी समाधान समूह के रूप में बदला जा सके।
निवेशकों के लिए सीख: घबराएं नहीं, समझदारी से करें फैसला
यह गिरावट भले ही एक दिन में बड़ी लगे, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सबक भी है। भू-राजनीतिक घटनाएं बाजार को अस्थायी रूप से प्रभावित करती हैं, लेकिन भारत का रिन्युएबल एनर्जी सेक्टर दीर्घकालिक रूप से बेहद मजबूत नींव पर खड़ा है। सरकार का 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य, बढ़ती घरेलू मांग और हरित ऊर्जा की दिशा में वैश्विक रुझान. ये सब इस सेक्टर को भविष्य में मजबूत बनाते हैं।
Waaree, NTPC Green, Adani Green और Suzlon जैसी कंपनियां लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं और नई परियोजनाएं चालू कर रही हैं। ऐसे में, जो निवेशक घबराकर बेचते हैं, वे अक्सर लंबे समय में अच्छे रिटर्न से चूक जाते हैं। किसी भी निवेश निर्णय से पहले बाजार की पूरी तस्वीर देखना, विशेषज्ञों से सलाह लेना और अपने जोखिम क्षमता को समझना बेहद जरूरी है।
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