वर्तमान समय में जो सोलर पैनल हम उपयोग कर रहे हैं, उनकी औसत एफिशिएंसी 20% के आसपास है। इसका मतलब है कि सूर्य की 100% रोशनी में से केवल 20% को ही बिजली में बदला जा रहा है, बाकी ऊर्जा या तो रिफ्लेक्ट हो जाती है या सही तरीके से उपयोग में नहीं आती है। कंपनियां जैसे Aiko Solar, LONGi और Maxeon लगातार इस एफिशिएंसी को बढ़ाने पर काम कर रही हैं और कुछ ने 24-25% तक की दर हासिल भी कर ली है। लेकिन अब साइंटिस्ट एक नई दिशा में बढ़ रहे हैं जिसे “Golden Solar” टेक्नोलॉजी कहा जा रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि मौजूदा पैनलों से 500% तक ज्यादा बिजली उत्पन्न की जा सकती है।

20% एफिशिएंसी की सीमा और उसका समाधान
अभी के सिलिकॉन बेस्ड पैनल सिर्फ एक खास स्पेक्ट्रम की रोशनी को ही बिजली में बदल पाते हैं, बाकी रंगों की ऊर्जा बेकार चली जाती है। ऊपर से पैनल की सतह से लगभग एक-तिहाई रोशनी वापस रिफ्लेक्ट हो जाती है। इस वजह से एफिशिएंसी की सीमा बढ़ाना मुश्किल रहा है। Golden Solar टेक्नोलॉजी में इस सीमा को तोड़ने के लिए पैनल की टॉप लेयर पर हनीकॉम्ब डिज़ाइन बनाई जाती है, जो रोशनी को फंसाकर अंदर तक पहुंचाती है और रिफ्लेक्शन को काफी हद तक कम कर देती है। इससे एफिशिएंसी 25-30% तक पहुंच सकती है।
Golden Solar में पेरोव्स्काइट और स्टैकिंग तकनीक
इस तकनीक का दूसरा बड़ा कदम पेरोव्स्काइट सेल्स का इस्तेमाल है। पेरोव्स्काइट को अलग-अलग रंगों की रोशनी को अवशोषित करने के लिए कस्टमाइज़ किया जा सकता है। उदाहरण के लिए एक सेल सिर्फ ब्लू लाइट को, दूसरा ग्रीन को और तीसरा रेड लाइट को बिजली में बदल सकता है। जब इन अलग-अलग सेल्स को स्टैकिंग (एक के ऊपर एक लगाने) तकनीक से जोड़ा जाता है तो एक ही सतह पर पूरा स्पेक्ट्रम कैप्चर हो जाता है, जिससे बिजली उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है।
भविष्य में 500% तक का सुधार
अगर हनीकॉम्ब डिज़ाइन, पेरोव्स्काइट स्पेक्ट्रम कंट्रोल और स्टैकिंग जैसी तकनीकें एक साथ व्यावसायिक स्तर पर सफल हो जाती हैं तो 500% तक का सुधार संभव हो सकता है। इसका मतलब है कि जो सिस्टम अभी 5 kW बिजली देता है, वही भविष्य में लगभग 25 kW तक दे सकता है, बिना ज्यादा जगह घेरते हुए। इसके साथ ही नई तकनीकों जैसे नैनोकोटिंग और क्वांटम डॉट्स भी रोशनी के इस्तेमाल को अधिकतम करने में मदद कर रही हैं। हालांकि, Golden Solar का व्यावसायिक उपयोग अभी रिसर्च स्टेज में है, लेकिन आने वाले वर्षों में यह सोलर इंडस्ट्री में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
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