आज दुनिया जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है, जहां हर देश ऐसी तकनीक की तलाश में है जो साफ, सस्ती और लगातार बिजली दे सके। इसी बीच फिलीपींस के एक युवा स्टूडेंट Carvey Ehren Maigue ने ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। उन्होंने फूड वेस्ट से बना ऐसा सोलर पैनल तैयार किया है जो बिना सीधी धूप के भी बिजली बनाता है और इसका नाम उन्होंने AuREUS दिया है यानी की Aurora Renewable Energy & UV Sequestration।

यह इनोवेशन उन्होंने सिर्फ कॉलेज प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं बल्कि किसानों और पर्यावरण दोनों की समस्या हल करने के लिए बनाया था। Carvey, Manila की Mapúa University में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र थे जब उन्होंने यह खोज की। उनकी प्रेरणा उनके खुद के UV-sensitive transition glasses और एक ऐसे ड्रिंक से मिली जो blacklight के नीचे चमक रहा था. इसने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि बादलों में भी UV किरणें मौजूद होती हैं। इतना ही नहीं, उनके इस आविष्कार ने उन्हें पहला ग्लोबल James Dyson Sustainability Award (2020) भी दिलाया, जिससे दुनिया का ध्यान उनकी ओर गया। इस पुरस्कार के साथ उन्हें £30,000 (लगभग $35,000) की राशि भी मिली।
कैसे काम करता है ये कमाल का AuREUS Solar Panel?
यह साधारण सोलर पैनलों से बिल्कुल अलग है क्योंकि यह सीधी सूरज की रोशनी पर निर्भर नहीं है। पारंपरिक पैनल तभी बिजली बनाते हैं जब उन पर पर्याप्त धूप पड़े, लेकिन AuREUS का सिद्धांत बिल्कुल नया और वैज्ञानिक रूप से उन्नत है।
इस पैनल की खासियत इसके ल्यूमिनेसेन्ट कण हैं, जो फलों और सब्जियों के बर्बाद हिस्सों यानी food waste से तैयार किए जाते हैं। Carvey इन बायोल्यूमिनेसेंट कणों को फलों और सब्जियों को कुचलकर, उनका रस निकालकर और फिर उसे छानने, आसवन (distillation) या भिगोने की प्रक्रिया से तैयार करते हैं। ये कण UV किरणों को अब्सोर्ब करते हैं और फिर उन्हें visible light में बदलकर पैनल के किनारों पर लगे photovoltaic cells तक पहुंचा देते हैं। इसके बाद ये सेल उसे DC बिजली में कन्वर्ट कर देते हैं।
सीधे शब्दों में प्रोसेस: UV Light → Visible Light → Electricity
Carvey के अनुसार, “Light, material की internal reflectance पर निर्भर करती है जो खुद को correct करती है और emitting edge की ओर guide करती है। इसे specific laser etching patterns से control भी किया जा सकता है।” दिलचस्प बात यह है कि COVID-19 lockdown के दौरान जब university lab बंद थी, तब Carvey ने यह प्रयोग अपनी माँ की kitchen में किया और कामयाब भी रहे!
सबसे खास बात यह है कि UV प्रकाश बादलों, छाया और वातावरण में हमेशा मौजूद रहता है, इसलिए यह पैनल बारिश, बादल, या कम रोशनी वाले दिनों में भी काम करता है। यहां तक कि इसे खिड़कियों, दीवारों और ऊर्ध्वाधर सतहों पर लगाया जा सकता है, जिससे शहरी क्षेत्रों में भी बिजली उत्पादन आसान हो जाता है।
किसानों, शहरों और पर्यावरण—तीनों के लिए गेम-चेंजर
Carvey ने इस तकनीक को बनाने के लिए लगभग 78-80 तरह के फलों और फसलों पर परीक्षण किया, जिनमें से 9 ऐसे मिले जो लंबे समय तक UV कैप्चर कर सकते थे. खासतौर पर लाल, नारंगी, पीले और हरे रंग के पौधे। इनसे तैयार किया गया synthetic resin Borealis Solar Windows और Astralis Solar Walls में उपयोग होता है, जिन्हें इमारतों पर लगाया जा सकता है। अभी पाँच रंगों (Red, Orange, Yellow, Green, Blue) में से Blue dye का एक stable alternative बनाना बाकी है. एक बार यह सफल हो गया तो sustainability का चक्र पूरा हो जाएगा।
इसके कई पर्यावरणीय और आर्थिक फायदे हैं जैसे फूड वेस्ट का उपयोग होकर कचरा कम होगा। किसानों को बेकार फसल से भी आय मिलेगी. विशेषकर उन किसानों को जो typhoon जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हैं। पारंपरिक सोलर पैनलों से ज्यादा क्षेत्रों में इंस्टॉल हो सकता है। UV पॉल्यूशन कम होगा और शहरों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। साथ ही material extraction अभी 80% efficient है और शोधकर्ता इसे 100% तक पहुंचाने में लगे हैं।
कहा जा रहा है कि जहां पारंपरिक पैनल सिर्फ 15–22% ही light capture कर पाते हैं, वहीं AuREUS लगभग 50% UV capture कर लेता है, जिससे बिजली उत्पादन काफी ज्यादा हो सकता है। अभी का सबसे बड़ा प्रोटोटाइप लगभग 3×2 फुट का lime-green panel है जो एक दिन में दो फोन चार्ज करने लायक बिजली बनाता है।
2026 तक यह टेक्नोलॉजी अभी प्रोटोटाइप स्टेज में है और real-world deployment सीमित है। लेकिन नई applications पर research जारी है. जैसे buses और trains की sides पर पैनल लगाना, outdoor signs और streetlights को power देना, और घरों व offices के लिए energy-harvesting windows बनाना। Carvey की कंपनी Hyperboréal Solutions इसे कमर्शियल बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। अगर यह सफलतापूर्वक बाजार में आता है, तो यह सोलर इंडस्ट्री के सबसे बड़े बदलावों में से एक साबित होगा।
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