इतिहास में पहली बार! TrinaSolar ने बनाए सबसे ताक़तवर Solar Panel — वही साइज, लेकिन बिजली कहीं ज़्यादा!

सोलर इंडस्ट्री में एक ऐसा रिकॉर्ड बना है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। TrinaSolar ने इतिहास में पहली बार इंडस्ट्रियल साइज के सबसे ताक़तवर सोलर पैनल तैयार कर दिखाए हैं। खास बात यह है कि इन पैनलों का साइज वही रखा गया है, जो आज के बड़े सोलर फार्म में इस्तेमाल होता है, लेकिन बिजली उत्पादन पहले से कहीं ज़्यादा हो गया है। यह काम किसी छोटे लैब सैंपल पर नहीं, बल्कि पूरे साइज के असली सोलर मॉड्यूल पर टेस्ट और सर्टिफिकेशन के साथ किया गया है, जिससे यह उपलब्धि और भी भरोसेमंद बन जाती है।

Trina Solar makes the most powerful panels

सोलर टेक्नोलॉजी में आया बड़ा ब्रेकथ्रू

TrinaSolar के इंजीनियर्स ने Huairou Laboratory के साथ मिलकर ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित की है, जिसमें एडवांस लाइट-एब्जॉर्बिंग मटेरियल को फैक्ट्री-लेवल प्रोडक्शन के अनुकूल बनाया गया। इस प्रोजेक्ट की अगुवाई Dr. Yifeng Chen ने की, जिनकी टीम ने यह साबित कर दिया कि जो रिज़ल्ट पहले सिर्फ रिसर्च प्रोटोटाइप तक सीमित थे, वे अब असली दुनिया के सोलर पैनल फॉर्मेट में भी हासिल किए जा सकते हैं। 

इस नई डिज़ाइन में पेरोव्स्काइट और क्रिस्टलाइन सिलिकॉन को एक साथ जोड़ा गया है, जिसे टैंडम सोलर सेल कहा जाता है। पेरोव्स्काइट ऊपर की लेयर में हाई-एनर्जी रोशनी को कैप्चर करता है, जबकि नीचे सिलिकॉन लेयर बाकी लाइट को बिजली में बदलती है। इस तालमेल से एनर्जी लॉस कम होता है और वही साइज का पैनल ज़्यादा पावर देने लगता है।

पावर बढ़ी, लेकिन चुनौतियाँ भी सामने

हालाँकि यह उपलब्धि एक तकनीकी छत यानी मैक्सिमम लिमिट को दिखाती है, फिर भी यह कोई फाइनल प्रोडक्ट नहीं है। जब पैनल का आउटपुट बढ़ता है तो वायरिंग, मेटल रिबन और रेसिस्टेंस जैसी समस्याएँ भी सामने आती हैं। TrinaSolar ने इन दिक्कतों को कम करने के लिए हाफ-कट सेल्स और मोटे कंडक्टर्स का इस्तेमाल किया, जिससे हीट लॉस कम हुआ और पैनल रेटेड आउटपुट के करीब बना रहा। 

बड़े साइज के पैनलों में वजन, हवा का दबाव और ट्रांसपोर्ट डैमेज भी अहम फैक्टर होते हैं, इसलिए मैकेनिकल डिज़ाइन पर भी उतना ही ध्यान दिया गया। इस रिकॉर्ड को Fraunhofer Institute for Solar Energy Systems CalLab जैसे भरोसेमंद टेस्ट सेंटर ने सर्टिफाई किया है, जिससे आंकड़ों पर इंडस्ट्री को पूरा भरोसा मिल सके।

भविष्य की सोलर इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा

पेरोव्स्काइट-सिलिकॉन टैंडम टेक्नोलॉजी सोलर इंडस्ट्री के लिए एक नई दिशा खोलती है, लेकिन लंबे समय तक टिकाऊपन सबसे बड़ा सवाल है। पेरोव्स्काइट लेयर गर्मी, नमी और तेज धूप में धीरे-धीरे बदल सकती है, जिससे परफॉर्मेंस गिरने का खतरा रहता है। इसके अलावा, आयन माइग्रेशन जैसी समस्याएँ भी समय के साथ आउटपुट को प्रभावित कर सकती हैं। बेहतर सीलिंग, एडवांस एन्कैप्सुलेशन और स्टेबल मटेरियल से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सालों का फील्ड डेटा ज़रूरी होगा। 

फिलहाल, TrinaSolar का यह रिकॉर्ड दिखाता है कि बिना साइज बढ़ाए सोलर पैनल से ज़्यादा बिजली निकालना अब मुमकिन है। आने वाले समय में अगर यह टेक्नोलॉजी बड़े पैमाने पर सस्ती और टिकाऊ साबित होती है, तो सोलर फार्म कम जगह में ज़्यादा पावर पैदा कर सकेंगे, जिससे रिन्यूएबल एनर्जी का भविष्य और भी मज़बूत होगा।

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